हास्य के लिए अपेक्षा का समझ में आना ज़रूरी है
यहाँ बर्लेस्क कॉमेडी (Burlesque Comedy) का अभ्यास एक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए ग्लैमरस प्रदर्शन की छोटी-सी पैरोडी के रूप में किया जा सकता है: तुम एक डिब्बे को किसी बेशकीमती खज़ाने की तरह पेश करते हो। सीधे खड़े होना, उसे सावधानी से उठाकर ले जाना और ढक्कन खोलने की तैयारी को औपचारिक बनाना, इस एक स्थिति के लिए काफ़ी है। इसके लिए तुम्हें न तो मंच के लिए कोई पूरी जीवन-कथा गढ़ने की ज़रूरत है, न ही एक पूरा अभिनय तैयार करने की। अगर तुम बर्लेस्क का उपयुक्त कोर्स चुनना चाहते हो, तो वहाँ तुम्हें कक्षाओं के स्वरूप की जानकारी मिलेगी।
दर्शकों को यह ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत नहीं कि उसके अंदर कौन-सा खज़ाना है। उन्हें बस यह समझना है कि तुम किसी असाधारण रूप से क़ीमती चीज़ की घोषणा कर रहे हो। एक साधारण रबर की बत्तख इस घोषणा के उलट है। आश्चर्य तभी काम करता है, जब दोनों बातें साफ़ दिखाई दें: तुम्हारा बड़ा दावा और छोटी, रोज़मर्रा की चीज़। अगर बत्तख डिब्बे के किनारे के पीछे छिपी रहे, तो दर्शकों को इसका अहम आधा हिस्सा दिखाई नहीं देगा।
यहाँ हास्यपूर्ण टाइमिंग का मतलब यह नहीं कि तुम जितनी देर हो सके, उतनी देर तक चुपचाप खड़े रहो। डिब्बा खोलने से पहले का विराम अपेक्षा को बढ़ाता है, और खोलने के बाद चीज़ को थामे रखना विरोधाभास को दर्शकों तक पहुँचने का समय देता है। दोनों की भूमिका अलग है। कोई तय सेकंड-गिनती इन भूमिकाओं की जगह नहीं ले सकती। प्रदर्शन को गंभीरता से करो, मज़ाक का इशारा पहले से खिलखिलाकर मत दो। पैरोडी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई औपचारिकता पर है, दर्शकों के शरीर, उम्र या मूल पर नहीं।




